कु्म्भ : आस्था और भक्ति का एक सुखद एहसास


आज हम आपको कुम्भ को लेकर कुछ ऐसे रोचक तथ्यों से रूबरू करा रहे हैं जो कुम्भ को दिव्य कुम्भ और भव्य कुम्भ तक बना देता है. कुम्भ का नाम आते ही अंतर्मन में एक आस्था और अध्यात्म का उद्गम स्वयंभू हो जाता है. कुम्भ नाम मात्र से निर्मल गंगा का विशाल तट आपको अपनी ओर आकर्षित करता है तो नागा साधुओं का विहंगम स्वरुप आपको मोक्ष की याद दिलाता है. मां गंगा में डुबकी लगा रहे करोड़ों लोग मानो आस्था और भक्ति का एक नए स्वरुप से रुबरु करा रहे हों. 

  • अध्यात्म, संस्कृति, धर्म, पर्व, परंपरा का देश कहा जाने वाला भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है तो प्रेरणादायी भी. भारत की मिट्टी में न जाने कितने ऐसे विरले जन्म लिए जो भारत के इतिहास को अजर अमर कर गए. अध्यात्म का जनक कहा जाने वाला भारत अनेकों ऐसे साधु-संतों को जन्म दिया जिन्हें इतिहास आज भी अपनी विरासत के रुप में संजोए हुए है. इसी अध्यात्म की कड़ी को आगे बढ़ा रहा कुंभ भी अपनी अलग पहचान रखता है. जिससे जुड़ी कुछ रोचक जानकारियां हम आप तक पहुंचा रहे हैं.



  • जहां कुंभ का प्रमुख आकर्षण साधु-संतों के 13 अखाड़े होते हैं। वहीं अब इसमें दो अखाड़े और शामिल किए गए हैं। ये अखाड़े हैं किन्नर अखाड़ा और महिला नागा साधुओं का अखाड़ा। कुंभ में अखाड़ों और साधु-संतों का अपना महत्व तो है ही साथ ही साथ देश-विदेश से भी लोग कुंभ का आनंद की अनुभूति करने संगम तट तक आते हैं. कुंभ आस्था के रूप में अकेला एक ऐसा आयोजन है जो पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य रखता है. कुंभ की यही विशेषता है जो कुंभ को भव्य कुंभ और दिव्य कुंभ बना देता है. दुनिया के सबसे बड़े कुंभ मेले जैसा धार्मिक-आध्यामिक अनुभव शायद ही कहीं मिले.



  • इन अखाड़ों के साधु-संत कुंभ की प्रमुख तिथियों के दिन पूरी शानों शौकत के साथ शाही स्नान करने निकलते हैं। शाही स्नान के लिए प्रशासन अखाड़ों से संगम तक संतों के लिए एक विशेष राजपथ बनाता है, जिस पर सिर्फ और सिर्फ अखाड़े चलते हैं। भारतीय संस्कृति के महापर्व कुंभ में अखाड़ों से जुड़े साधु-संतों के शाही स्नान का विशेष महत्व है. कुंभ का पहला स्नान साधु संन्यासी करते हैं। इसे शाही स्नान कहते हैं. इसके बाद ही आम लोगों को स्नान करने की अनुमति मिलती है। शाही स्नान भोर 3 बजे से शुरू होता है।



  • कुंभ मेले को दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक मेले की मान्यता मिली है। कुंभ ऐसा मेला है जिसमें देश से ही नहीं विदेशी भक्तों की संख्या भी बहुत अधिक होती है। कुंभ मेले को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया
    है।



  • कुंभ विश्व के सबसे बड़े धार्मिक मेले में से एक है. कुंभ का आयोजन देश के 4 प्रमुख शहरों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में किया जाता है। इन शहरों में प्रत्येक 12 सालों में विशेष ज्योतिषीय योग बनने पर कुंभ मेला लगता है। जिसमें इन चारों स्थानों में प्रयाग का कुंभ विशेष स्थान रखता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवासुर संग्राम के दौरान इन्हीं 4 स्थानों पर अमृत की बूँदे गिरी थीं।



  • कुंभ में प्रमुख आकर्षण साधु-संत होते हैं. सोने-चांदी के सिंहासनों पर विराजमान साधु-संत और नागा साधुओं द्वारा किए जाने वाले शस्त्र और अस्त्र का प्रदर्शन देशी-विदेशी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। विभिन्न प्रकार की साधना और वेषभूषा वाले बाबा लोगों की आकर्षण का केंद्र होते हैं। किसी की दस से बारह फिट लंबी जटाएं अनेकों रुपों का एहसास करा रही होती है तो कोई अपनी जीभ, नाक, कान आदि छिदवाए आपको दिखाई देगा। इसी तरह कोई नग्न तो कोई रूद्राक्ष की माला से खुद को ढंके हुए नजर आ जायेगा।

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