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लालू और नीतीश की सरकारें बिहार से पलायन रोकने में कैसे रहीं असफल

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  बिहार में पलायन बड़ी समस्या बिहार में जब भी जन समस्याओं की बात होती है तो बेरोजगारी, गरीबी और भुखमरी, भ्रष्टाचार, गड्ढायुक्त सड़कें, बेसहारों को मकान की असुविधा, ध्वस्त कानून व्यवस्था, बदहाल शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था, जल एवं बिजली आपूर्ति जैसी समस्याएं तो कई सामने आ जाती हैं लेकिन बिहार के लिए पलायन सबसे बड़ी समस्या है. यहां रोजी-रोटी और शिक्षा को लेकर पलायन आम बात है. बिहार का ऐसा कोई कोना नहीं हैं जहां से पलायन ना हुआ हो. पलायन बिहार की नियती बन चुका है. इसमें सबसे अधिक शिकार कमजोर तबके के लोग होते आ रहे हैं. लेकिन ऐसा भी नहीं कि मध्यम व उच्च वर्ग के लोग बिहार से पलायन नहीं करते हैं. अच्छी शिक्षा व अच्छी नौकरी की चाह में ये वर्ग भी बिहार से पलायन करने को मजबूर हैं. विपक्ष में रहने वाली पार्टियां इस पर खूब बोलती हैं लेकिन सत्ता में आने व गठबंधन में शामिल होते ही इस पर चुप्पी साध लेती हैं. पार्टियां चाहे बीजेपी, कांग्रेस, राजद, जदयू व लोजपा कोई भी हो. सभी के लिए पलायन एक सियासी मुद्दा है लेकिन कोई भी दल इस पर गंभीर नहीं दिखाई देते हैं.  आलम ये है कि देश के कई ऐसे राज्य ह...

शहरों का आकर्षण, गांव से मोहभंग का बन रहा कारण

गांवों में बसने वाला भारत बड़ी तेजी से शहरों की ओर आकर्षित होता जा रहा है और लोगों का गांवों से मोहभंग भी होता जा रहा है. अगर यह मोहभंग ऐसे ही जारी रहा तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में भारत की वास्तविक पहचान धीरे-धीरे बदल सकती है. गांवों से पलायन करने के मुख्य कारणों में अगर रोजी-रोजगार है तो कहीं न कहीं मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना भी एक महत्वपूर्ण वजह है. आज जीवनयापन के लिए गांवों में रोजगार की सुविधा न होने के कारण लोग घर-परिवार छोड़कर नौकरी की चाह में शहरों की ओर ताक रहे हैं. पलायन के चलते कहीं न कहीं इससे कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है. कृषि प्रधान देश कहा जाने वाला भारत अपने किसानों को जीवनयापन के लिए आधार बनने के बजाय आधार खोता जा रहा है. कृषि के परिणाम से विवश होकर लोग अन्य रास्ता चुनने पर मजबूर हो रहे हैं. कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले भारत के लिए कृषि चुनौती बनता जा रहा है. कृषि क्षेत्र में घटता लाभ और बढ़ती महंगाई अन्य व्यवसाय चुनने के लिए विवश कर रही है.  आज हर एक परिवार से एक न एक सदस्य शहरों में नौकरी के लिए जाने को मजबूर हैं. और जो जा रह...