खेड़ा आंदोलन: बापू के नेतृत्व में लड़ी गई किसानों की सफल लड़ाई
खेड़ा आंदोलन: जब गांधी जी ने फिर से बुलंद की किसानों के हक की आवाज देश और देशवासियों पर जब जब संकट आया बापू ने एक सशक्त पिता के रूप में देश को मार्गदर्शन दिया और संकटों का डटकर सामना किया. वह अपने पहले अवज्ञा आंदोलन के जरिए देश के कोने कोने में चर्चित हो चुके थे. अंग्रेजों के अत्याचार के तले दबा हुआ हर विवश भारतीय बापू को अपना रक्षक मानने लगा था. देश पर अंग्रेजों के अत्याचार का संकट बढ़ता जा रहा था तो वहीं किसानों पर प्राकृतिक आपदा, श्रमिकों पर बेरोजगारी का कहर बढ़ रहा था. 1917 में बिहार के चंपारण में किसानों की लड़ाई लड़ चुके और उन्हें न्याय दिला चुके बापू को उनका गृह प्रदेश गुजरात खुद पुकार रहा था. 1918 में गुजरात के खेड़ा नामक गांव में बाढ़ आ गई तथा किसानों की फसल तबाह हो गई. फसल की तबाही से परेशान किसान दर दर की ठोकरें खा रहे थे. उनके सामने परिवार का पालन पोषण, कर और कर्ज का संकट खड़ा था. किसानों ने अंग्रेज सरकार से करों के भुगतान में छूट देने का अनुरोध किया लेकिन अंग्रेज अधिकारियों ने उनके प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया. किसानों ने इस दुविधा से निकलने के लिए बापू ...