जानें! भाई दूज मनाने के पीछे क्या है मान्यता?

पांच दिन तक चलने वाले दीपावली पर्व के अंतिम दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से सम्बंधित है. इस पर्व को भाऊ बीज, टिक्का, यम द्वितीया और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. यह त्‍योहार भाई-बहनों के बीच प्रेम और स्नेह भाव को बढ़ाता है. इस दिन बहनें भाई की लंबी आयु और उनके स्वास्थ्य की मंगलकामना का व्रत रखती हैं. भाई बहन के इस पर्व पर बहन भाई के टीका कर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है. इस पर्व को भातृ द्वितीया भी कहा जाता है. 
कहा जाता है कि सूर्य की पत्नी संज्ञा के पुत्र यम और पुत्री यमुना दो संतान थी. सूर्य के तेज को न सह सकने के कारण संज्ञा ने छाया का वेश बनाया और वो उत्तरी ध्रुव में जा कर रहने लगी, तभी से यमुना पृथ्वी पर आकर रहने लगी और यहीं रहकर कृष्ण का इंतजार करने लगीं. यहीं पर यमराज भाई दूज के दिन अपनी बहन यमुना के पास आये. जहाँ यमुना ने अपने भाई का खूब सत्कार किया. जिससे खुश होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा. इस पर यमुना ने कहा कि भाई दूज के दिन अगर इस जगह पर भाई-बहन एक दुसरे का हाथ पकड़ कर स्नान करें तो आप उनको यम फांस (जीवन-मरण) और नरक से मुक्ति दे दें. इसपर यमराज ने यमुना को ये वरदान दिया, तभी से भाई दूज के दिन भाई-बहन एक दूसरे का हाथ पकड़ कर यमुना में स्नान करते हैं.   
भाई दूज के दिन होने वाले इस स्नान को लेकर देश-विदेश में बड़ी मान्यता है. इस दिन यमुना में स्नान करने के लिये भाई-बहन बड़ी दूर-दूर से आते हैं और स्नान करते हैं. माना जाता है कि इस दिन का यमुना में नहाने और पूजा अर्चना करने से यम फांस (जन्म-मरण) से मुक्ति मिल जाती है और अकाल मृत्यु भी टल जाती है. साथ ही यमुना में स्नान करने से मनुष्य के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और यम के दूत भी उसके पास नहीं आते. यमुना में एक दूसरे का हाथ पकड़कर डुबकी लगाते हैं. फिर विशेष पूजा कर एक दूसरे की लंबी आयु की कामना करते हैं.   

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