जानें किस पशु प्रेमी के सम्मान में मनाया जाता है विश्व पशु दिवस?
1931 से लगातार प्रति वर्ष 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसको मनाने की शुरुआत इटली के फ्लोरेंस से हुई थी. पशु प्रेमी और पर्यावरण संरक्षक संत कहे जाने वाले सैंट फ्रैंसिस के सम्मान में यह दिन विश्व पशु दिवस के रूप में मनााया जाता है. 4 अक्टूबर सैंट फ्रैंसिस का फीस्ट डे/ दावत का दिन होता है. यह दिन जानवरों के प्रति संवेदना और जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दुनिया के सभी देशों में मनाया जाता है. हर धर्म, सम्प्रदाय के लोग सारे भेदभाव को त्यागकर यह दिन पूरे मन से मनाते हैं. जानवरों के प्रति क्रूरता, पशु अधिकारों के उल्लंघन आदि जैसे विभिन्न मुद्दों से अवगत कराकर पशुओं के प्रति लोगों की दयाभावना को जागृत करना व उनमें जीवों के प्रति सकारात्मक चेतना को जीवित करने के उद्देश्य से भी यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है. अर्जेंटीना में इस दिन को डॉ. ल्यूकस इग्नेशियो अल्बैरासिन की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है. डोमिंगो फॉस्टिनो सारमिएंटो के साथ मिलकर डॉ. ल्यूकस ने सोसाइडेड अर्जेंटिना प्रोटेक्टोरा डि एनीमैलेस की स्थापना की थी. इस संस्था को अर्जेंटिना सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ एनीमल्स भी कहा जाता है.
व्यक्तिगत पशु कार्यकर्ता, पशु कल्याण संगठन, पशु प्रेमियों द्वारा विश्व पशु दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. इन कार्यक्रमों के जरिये लोगों का पशुओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव लाना तथा पशुओं व जानवरों के प्रति सामाजिक न्याय स्थापित करना जैसे अनेक विचार होते हैं. यह सत्य है कि धीरे-धीरे पशु दिवस के प्रति जागरूकता बढ़ी है. लोगों में रुचि आ रही है. इसका निर्णय हम अब तक होते आये कार्यक्रमों के आधार पर कर सकते हैं. लेकिन पशुओं पर बढ़ रहे खतरे को लेकर उनकी सुरक्षा और संरक्षण के कड़े इंतजाम जैसे विधिक कानून निर्माण की आवश्यकता है. क्योंकि पशु, मानव व पर्यावरण ये सभी एक दूसरे के आधार हैं.
सरकार के साथ-साथ हम सभी का नैतिक दायित्व है कि जानवरों पर होने वाले अत्याचार को रोकने में सहयोग करें. मानव द्वारा तस्करी, जानवरों का अवैध व्यापार, अवैध शिकार को रोककर ही लुप्त हो रहे प्रजातियों के अस्तित्व को जीवित रखा जा सकता है. जानवरों को संऱक्षण प्रदान करने वाला कानूूून, वन्यजीव संऱक्षण अधिनियम 1972 को मजबूती प्रदान करते हुए 2003 में अधिनियम में संशोधन कर नये प्रावधान जोड़े गए. हालांकि कड़े कानून निर्माण के बाद भी जानवरों पर खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा. धीरे-धीरे कई ऐसी प्रजातियां हैं जो लुप्त होने के कगार पर हैं. जानवरों के अंदर के आवाज को महसूस कर उनके अस्तित्व को बचाया जा सकता है.

Jaanvaaro me bhi feelings Hoti hai, hum sabki inko mahsoos Karne ki jaroorat hai.
ReplyDeleteहां त्रिशूल, बेशक आगे पड़ेगा.
ReplyDeleteBadhiya jankri ....sunder lekh ...👌👌👌
ReplyDeleteShukriyaa
Delete