धर्म वही जो आगे बढ़ाए


आज पूरे विश्व में सभी अपनी पहचान स्थापित करने की दौड़ में है और उसके लिए लड़ रहै हैं। विश्व में रहने वाले सभी व्यक्तियों का कोई ना कोई धर्म है। सबकी अपने धर्म के प्रति सोच, समझ और संवेदनाएं जुड़ी होती हैं और सभी धर्म का आदर व सम्मान करते हैं। परंतु आज धर्म की वास्तविक स्थिति बदलती नजर आ रही है। धर्म कट्टरता का पर्याय बनता जा रहा है। सभी धर्मों के अनुयायी अपने धर्म के प्रति कट्टर बने रहते हैं, और उपदेश देते हैं कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।  आखिर  धर्म के नाम पर हत्या, संघार, विनाश करना क्या यही इंसानियत है क्या कोई धर्म यही संदेश देता है? आज एक धर्म दूसरे धर्म को खत्म करने पर आमादा है।
आज धर्म के जिस रूप को प्रचारित एवं व्याख्यायित किया जा रहा है उससे बचने की जरूरत है,वास्तव में धर्म संप्रदाय नहीं है। धर्म मनुष्य में मानवीय गुणों के विकास की प्रभावना है, सार्वभौम चेतना का सतसंकल्प है। आज धर्म के मायने व उसका अर्थ बदलता जा रहा है। धर्म के नाम पर अनेक तर्क कुतर्क किए जा रहे हैं, जो स्वस्थ समाज में विसंगतियां बढ़ा रही है। धर्म स्वतंत्रता/आजादी का प्रेरक होता है परंतु धर्म के ठेकेदार धर्म के नाम पर मानव हित को नजरअंदाज करते हुए अनेक परंपराओं को थोप रहे हैं, जिसमें मनुष्य की कोई रुचि नहीं है ऐसे में धर्म के नाम पर जबरदस्ती किया जा रहा है,जो कि कोई भी धर्म जबरदस्ती करने का कोई स्थान नहीं देता। सभी धर्म स्वतंत्रता को बढ़ावा देते हैं। सभी धर्मों का उपदेश/उद्देश्य एक ही है मानव कल्याण व विकास।  सभी धर्म शांति,समर्पण,बराबरी,सहयोग, सहनशीलता बलिदान की भावना से परिचित कराता है और इन्हीं से मिलकर धर्म बनता है। अहिंसा किसी धर्म का हिस्सा नहीं है।सभी धर्म प्रेम के संदेश वाहक हैं।सभी धर्मों का ध्येय एक तो सबका सम्मान करते हुए उस विचार के साथ रहना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। सभी धर्म इंसानियत को  सबसे बड़ा धर्म मानते हैं।
इंसानियत वही जिसमें करुणा प्रेम त्याग हो।

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