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Showing posts from September, 2019

कविता की दुनिया के सरताज थे 'राष्ट्रकवि' मैथलीशरण गुप्त

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हिंदी साहित्यकारों में कुछ ही विरले हुए जिन्होंने ख्याति और उपाधि के साथ हिंदी और देश को गर्व करने का मौका दिया हो. आधुनिक हिंदी कविता के दिग्गजों की श्रेणी में एक नाम मैथिली शरण गुप्त का भी आता है. उन्होंने देश प्रेम, समाज सुधार, धर्म, राजनीति, भक्ति आदि सभी विषयों पर रचनाएं की. उनके राष्ट्रप्रेमी कविताओं के बदौलत गांधी जी ने उन्हें "राष्टकवि" की संज्ञा प्रदान की. मैथिलीशरण गुप्त की लेखनी हर विषयों पर असरदार रही. उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी सृजनात्मक गुणों के द्वारा रचनाएं की.  काव्य कुल में जन्में मैथिलीशरण गुप्त का जन्म मध्य प्रदेश के चिरगाँव [झाँसी] में पिता रामचरण जी और माता काशी देवी के यहाँ 3 अगस्त 1886 को हुआ. वह अपने माता पिता के तीसरे संतान थे. मैथिलीशरण गुप्त बचपन से ही होनहार थे. सामाजिक विडम्बना के चलते बाल्यकाल में ही 1895 में उनकी शादी कर दी गई. तब वह मात्र 9 वर्ष के थे. पाँच वर्ष बाद गौना हुआ और पत्नी के साथ उनका जीवन सुखमय व्यतीत हो रहा था. मगर विधाता को कुछ और मंजूर था. सामान्य बालक को असमान्य व्यक्ति के रूप में देखना चाहते थे और हुआ ऐसा कि 1903 में प...

असहयोग आंदोलन: बापू का वह आंदोलन जिसने स्वराज की चिंगारी को हवा दी

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देश बापू का कर्जदार है और समाज इस कर्ज को उतारने के लिए बाध्य. हालांकि बापू किसी व्यक्ति या वस्तु का नाम नहीं है बल्कि बापू विचार का नाम है. बापू के जीवन का सार ही प्रेरणा है. जिसका अनुकरण ही एकमात्र विकल्प. बापू ने देश को बाधाओं से मुक्त कराने के लिए अपना संपूर्ण जीवन महायज्ञ में लगा दिया था. बापू ने दुनिया को शांति के सहारे संघर्ष को परिणाम में बदलने का हुनर सिखाया. अहिंसा के पुजारी बापू ने देश और समाज को एकजुट करने के लिए, देश को अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए अनेकों आंदोलन किए. कहा जा सकता है कि बापू का जीवन आंदोलनों से भरा है. चंपारण सत्याग्रह से बापू ने हक के लड़ाई की शुरुआत की. यहीं से देश में विद्रोह की चिंगारी आग का रूप लेने लगी थी. पांच महीने तक चले खेड़ा आंदोलन ने भी बापू को जननेता बना दिया था. अब बापू दूत के रूप में जन्म ले रहे थे. चहुंओर बापू की चर्चा होने लगी थी. इसी बीच 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा लाया गया रौलेट एक्ट देशवासियों पर कहर बन रहा था. इस एक्ट के विरोध में 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के जलियांवाला बाग में हुए भारतीयों के नरसंहार से देश जल रहा था. हर...

खेड़ा आंदोलन: बापू के नेतृत्व में लड़ी गई किसानों की सफल लड़ाई

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खेड़ा आंदोलन:  जब गांधी जी ने फिर से बुलंद की किसानों के हक की आवाज देश और देशवासियों पर जब जब संकट आया बापू ने एक सशक्त पिता के रूप में देश को मार्गदर्शन दिया और संकटों का डटकर सामना किया. वह अपने पहले अवज्ञा आंदोलन के जरिए देश के कोने कोने में चर्चित हो चुके थे. अंग्रेजों के अत्याचार के तले दबा हुआ हर विवश भारतीय बापू को अपना रक्षक मानने लगा था. देश पर अंग्रेजों के अत्याचार का संकट बढ़ता जा रहा था तो वहीं किसानों पर प्राकृतिक आपदा, श्रमिकों पर बेरोजगारी का कहर बढ़ रहा था. 1917 में बिहार के चंपारण में किसानों की लड़ाई लड़ चुके और उन्हें न्याय दिला चुके बापू को उनका गृह प्रदेश गुजरात खुद पुकार रहा था. 1918 में गुजरात के खेड़ा नामक गांव में बाढ़ आ गई तथा किसानों की फसल तबाह हो गई. फसल की तबाही से परेशान किसान दर दर की ठोकरें खा रहे थे. उनके सामने परिवार का पालन पोषण, कर और कर्ज का संकट खड़ा था. किसानों ने अंग्रेज सरकार से करों के भुगतान में छूट देने का अनुरोध किया लेकिन अंग्रेज अधिकारियों ने उनके प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया. किसानों ने इस दुविधा से निकलने के लिए बापू ...

साहित्यिक सेवाओं के लिए पद्मभूषण से सम्मानित हुए थे हजारी प्रसाद द्विवेदी

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हिन्दी साहित्य के महान विभूतियों में से एक आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का योगदान अद्वितीय है. रचनात्मक प्रतिभा के धनी आचार्य द्विवेदी आलोचक के साथ-साथ बड़े रचनाकार भी थे. कई विद्वानों का मानना है कि उन्होंने ही कबीर जैसे महान संत को दुनिया से परिचित कराया. सामान्य परिवार में जन्में द्विवेदी का जीनव संघर्षों से भरा रहा है. उन्होंने संघर्षों से मुंह न मोड़ते हुए उसका डटकर सामना किया और जीवन को सार्थक बनाया. आचार्य द्विवेदी को याद किया जाता है तो उनके व्यक्तित्व की चर्चा खुद ब खुद लोगों के बीच आ ही जाती है. उनका व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली और उनका स्वभाव बड़ा सरल और उदार था. हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी निबन्धकार, आलोचक और उपन्यासकार थे. उनका जन्म ब्राह्मण कुल में श्रावण शुक्ल एकादशी संवत् 1964 तदनुसार 19 अगस्त 1907 ई० को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के 'आरत दुबे का छपरा', ओझवलिया नामक गाँव में हुआ था. इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी और माता का नाम श्रीमती ज्योतिष्मती था. इनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था. इनके पिता पं. अनमोल द्विवेदी संस्कृत के प्रकांड ...

चंपारण आंदोलन: गांधी जी के स्वतंत्रता संघर्ष का भारत में पहला कदम

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देश बापू यानी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का 150वां जयंती वर्ष मना रहा है. महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहन दास करमचंद गांधी था. इनका जन्म गुजरात के पोरबंदर में 2 अक्टूबर 1869 को हुआ था. देश गर्व से मोहनदास करमचन्द गांधी को बापू, महात्मा, राष्ट्रपिता जैसे उपनामों से संबोधित करता है. भारत और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए बापू विरले थे. उनका योगदान विश्व प्रसिद्ध है और पूरा विश्व उनके योगदान का ऋणी है. बापू ने देश दुनिया को मानवता का संदेश दिया. सत्य, अहिंसा, विश्वास, सच्चाई, सादगी, संघर्ष, देशप्रेम, मानव प्रेम आदि सिद्धांत हैं, जिनके आधार पर बापू ने जीवनयात्रा की. बापू की संपूर्ष जीवन यात्रा ही लोगों के लिए संदेश है, प्रेरणा है. कुरीतियों से दूर सच्चे महामानव थे बापू. उन्होंने अपने आदर्शों, विचारों और सिद्धांतों के जरिए दुनिया को बताया कि सच्चे संकल्प, पूर्ण ईमानदारी, धैर्य, अहिंसा के बलबूते भी अधिकारों की रक्षा की जा सकती है. बापू किसानों, श्रमिकों, मजदूरों के सच्चे मसीहा थे. वह जीवनपर्यंत दूसरों के हक और हूकूम की लड़ाई लड़ते रहे. समान भाव के साथ वह सबकी सेवा करते रहे. उन्होंने कभी ...