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Showing posts from November, 2018

डिजिटल विज्ञापन: यम्मी फूड डेलिवरी ऐप

यम्मी फूड डेलिवरी ऐप: दौड़ती भागती जिंदगी में हर व्यक्ति के पास समय का अभाव है. कोई काम की तलाश में भागता फिर रहा है तो कोई काम के पीछे भागता फिर रहा है. ऐसे में हर कोई काम को लेकर इतना मशगूल हो जाता है कि खाना पीना भी भूल जाता है. सुबह आफिस निकलने के जल्दी में व्यक्ति लंच रखना भूल जा रहा है तो कोई खाना ही छोड़ जाता है. वहीं घर से दूर बाहरअकेले रह रहे व्यक्ति के लिए खाना रहना एक बड़ी समस्या है. ऐसे में वह इंसान बाहर की चीजों के सहारे हो जाता है. फिर वह डिजिटल दौर में ड़िजिटल तरीकों से सुविधाओं का सहारा लेता है. ऐसे हर किसी व्यक्ति के बारे में सोच कर उनकी खाने जैसी परेशानियों का निपटारा करने के लिए डिजिटल फूड डेलिवरी ऐप बनाया गया है. जिसकी झलक वीडियो के जरिए देख सकते हैं. 

जानें! भाई दूज मनाने के पीछे क्या है मान्यता?

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पांच दिन तक चलने वाले दीपावली पर्व के अंतिम दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को यह पर्व मनाया जाता है. यह पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से सम्बंधित है. इस पर्व को भाऊ बीज, टिक्का, यम द्वितीया और भातृ द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. यह त्‍योहार भाई-बहनों के बीच प्रेम और स्नेह भाव को बढ़ाता है. इस दिन बहनें भाई की लंबी आयु और उनके स्वास्थ्य की मंगलकामना का व्रत रखती हैं. भाई बहन के इस पर्व पर बहन भाई के टीका कर उसकी लम्बी उम्र की कामना करती है. इस पर्व को भातृ द्वितीया भी कहा जाता है.  कहा जाता है कि सूर्य की पत्नी संज्ञा के पुत्र यम और पुत्री यमुना दो संतान थी. सूर्य के तेज को न सह सकने के कारण संज्ञा ने छाया का वेश बनाया और वो उत्तरी ध्रुव में जा कर रहने लगी, तभी से यमुना पृथ्वी पर आकर रहने लगी और यहीं रहकर कृष्ण का इंतजार करने लगीं. यहीं पर यमराज भाई दूज के दिन अपनी बहन यमुना के पास आये. जहाँ यमुना ने अपने भाई का खूब सत्कार किया. जिससे खुश होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा. इस पर यमुना ने कहा कि भाई दूज के दिन अगर इस जगह पर भा...

शहरों का आकर्षण, गांव से मोहभंग का बन रहा कारण

गांवों में बसने वाला भारत बड़ी तेजी से शहरों की ओर आकर्षित होता जा रहा है और लोगों का गांवों से मोहभंग भी होता जा रहा है. अगर यह मोहभंग ऐसे ही जारी रहा तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में भारत की वास्तविक पहचान धीरे-धीरे बदल सकती है. गांवों से पलायन करने के मुख्य कारणों में अगर रोजी-रोजगार है तो कहीं न कहीं मूलभूत सुविधाओं का अभाव होना भी एक महत्वपूर्ण वजह है. आज जीवनयापन के लिए गांवों में रोजगार की सुविधा न होने के कारण लोग घर-परिवार छोड़कर नौकरी की चाह में शहरों की ओर ताक रहे हैं. पलायन के चलते कहीं न कहीं इससे कृषि क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है. कृषि प्रधान देश कहा जाने वाला भारत अपने किसानों को जीवनयापन के लिए आधार बनने के बजाय आधार खोता जा रहा है. कृषि के परिणाम से विवश होकर लोग अन्य रास्ता चुनने पर मजबूर हो रहे हैं. कृषि क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले भारत के लिए कृषि चुनौती बनता जा रहा है. कृषि क्षेत्र में घटता लाभ और बढ़ती महंगाई अन्य व्यवसाय चुनने के लिए विवश कर रही है.  आज हर एक परिवार से एक न एक सदस्य शहरों में नौकरी के लिए जाने को मजबूर हैं. और जो जा रह...