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Showing posts from October, 2018

जानें कौन-कौन है साल 2018 का नोबेल विजेता?

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साल 2018 नोबेल पुरस्कार के लिए अर्थशास्त्र, शांति, केमिस्ट्री, फिजिक्स, कैंसर के इलाज इन सभी क्षेत्रों में अपना बेहतर योगदान देेने वालों के नामों की घोषणा की गई है. जिसमें अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए दो अमेरिकी अर्थशास्त्री विलियम डी नोर्दहॉस और पॉल एम रोमर को चुना गया है. विलियम नोर्दहॉस येल यूनिवर्सिटी और पॉल रोमर न्यूयॉर्क के स्टर्न बिजनेस स्कूल से ताल्लुक रखने वाले दोनों प्रोफेसर हैं. दोनों ने जलवायु परिवर्तन और इकोनॉमिक ग्रोथ पर रिसर्च की थी. जिन्हें इकोनॉमिक ग्रोथ रिसर्च के लिए 2018 का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा. काॅन्गो के जाने-माने सर्जन और बुकावु शहर में पनजी अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डेनिस मुकवेज औरइराक की मानवाधिकार कार्यकर्ता नादिया मुराद को शांति क्षेत्र में नोबेल के लिए नोबेल नॉर्विजियन कमेटी द्वारा शुक्रवार को नामित किया गया है. दोनों नोबेल विजेताओं द्वारा मासूमों पर हिंसा पर नियंत्रण के लिए एवं उसके रोकथाम के लिए कई बार जान जोखिम में डालकर कदम उठाए जा चुके हैं. कमेस्ट्री के क्षेत्र में अमेरिका की फ्रांसेस एच अरनॉल्ड, जॉर्ज पी स्मिथ और ब्रिटेन के सर ग्र...

जानें किस पशु प्रेमी के सम्मान में मनाया जाता है विश्व पशु दिवस?

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1931 से लगातार प्रति वर्ष 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसको मनाने की शुरुआत इटली के फ्लोरेंस से हुई थी. पशु प्रेमी और पर्यावरण संरक्षक संत कहे जाने वाले सैंट फ्रैंसिस के सम्मान में यह दिन विश्व पशु दिवस के रूप में मनााया जाता है. 4 अक्टूबर सैंट फ्रैंसिस का फीस्ट डे/ दावत का दिन होता है. यह दिन जानवरों के प्रति संवेदना और जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से दुनिया के सभी देशों में मनाया जाता है. हर धर्म, सम्प्रदाय के लोग सारे भेदभाव को त्यागकर यह दिन पूरे मन से मनाते हैं. जानवरों के प्रति क्रूरता, पशु अधिकारों के उल्लंघन आदि जैसे विभिन्न मुद्दों से अवगत कराकर पशुओं के प्रति लोगों की दयाभावना को जागृत करना व उनमें जीवों के प्रति सकारात्मक चेतना को जीवित करने के उद्देश्य से भी यह दिन बहुत महत्वपूर्ण है. अर्जेंटीना में इस दिन को डॉ. ल्यूकस इग्नेशियो अल्बैरासिन की पुण्यतिथि के रूप में मनाई जाती है. डोमिंगो फॉस्टिनो सारमिएंटो के साथ मिलकर डॉ. ल्यूकस ने सोसाइडेड अर्जेंटिना प्रोटेक्टोरा डि एनीमैलेस की स्थापना की थी. इस संस्था को अर्जेंटिना सोसायटी ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ एनीमल...

छोटे कद के बड़े नेता थे लालबहादुर शास्त्री

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भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का जन्मजयंती वर्ष पूरा देश गर्व के साथ मनाया. उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्में शास्त्री का पूरा जीवन देशप्रेम में ही बीता. अतिशयोक्ति न होगी अगर शास्त्री को देशभक्त का पर्याय कहा जाए तो. देशवासियों को 'जय जवान जय किसान' का संदेश देने वाले भारत माँ की चेतना को जागृत करने वाले एक ऐसे पुरोधा जो राजनीति भी करते थे तो उनके सिद्धांत ऐसे थे कि वे कहते थे "लोगों को सच्चा लोकतंत्र और स्वराज कभी भी झूठ और असत्य से प्राप्त नहीं हो सकता".  बेहद गरीबी की हालात में गुजर-बसर करने वाले शास्त्री जी कभी संघर्षों से घबराए नहीं. उन्होंने परिस्थितियों से कभी मुँह नहीं मोड़ा. सदैव डटकर सामना किया, तब जाकर एक सामान्य नाम आज हमारे बीच में अमर हुआ है. इतना ही नहीं उनका व्यक्तित्व सामान्य नहीं था या कहें कि सामान्य से लालबहादुर शास्त्री असामान्य व्यक्तित्व थे. ऐसा इसलिए भी कि शास्त्री जी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदारी व प्रखर राष्ट्रवादी सोच से भरपूर तो थे ही साथ ही साथ सादगी के प्रतिमूर्ति थे. उन्हें त्याग और समर्पण के संवाहक प्रधानम...