माकपा के हाथों से रेत की तरह फिसलती रही बंगाल की चाभी, किले में शून्य के आसार
पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक एकछत्र आधिपत्य करने वाला वामदल धीरे-धीरे शून्य की ओर खिसकता जा रहा है. वक्त ने ऐसे पायदान पर लाकर खड़ा कर दिया है कि झंडा उठाने की बात तो दूर पार्टी के नाम लेने वालों की भी संख्या कर पाना मुश्किल हो रहा है. तमाम सर्वे एजेंसियों द्वारा 2019 के लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल जारी किए जा रहे हैं. जिसमें माकपा के लिए अच्छे संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक 34 वर्षों तक बंगाल पर राज करने वाली माकपा का अस्तित्व अंत की ओर है. 2014 के लोकसभा चुनाव में दो सीट पाने में सफल माकपा का खाता खुलता भी नहीं दिख रहा है. उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं. बात करें 1980 के लोकसभा चुनाव की तो वाममोर्चा को इस चुनाव में 38 सीटों पर जीत हासिल हुई थी और 50 फीसदी वोट भी मिले थे. एक लंबे वक्त तक लालकिले से मशहूर बंगाल में माकपा का अपना वर्चस्व रहा है. 1996 के लोकसभा चुनाव में भी माकपा को 33 तो 2004 के आम चुनाव में 34 सीटें हासिल हुई थी. वक्त की नजाकत का असर देखिए कि 5 वर्षों में ही सियासत में अप्रतिम छाप रखने वाली माकपा को अपने ही गढ़ में ...