एससी/एसटी प्रमोशन आरक्षण: राजनैतिक पार्टियों के लिए कहीं वरदान तो नहीं!
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर जोरों से चर्चा का विषय बन गया है. जिसको लेकर लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. ऐसे में आरक्षण के पीछे के वजहों को जानना बेहद आवश्यक हो जाता है. धर्म, जाति, नस्ल के आधार पर शोषित व शासित मूल निवासी एससी/एसटी समुदाय तथाकथित वंचित समाज को सामाजिक न्याय स्थापित करने के लिए यानि सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक रूप से समाज के मुख्यधारा से लोगों को जोड़ने के लिए भारतीय संविधान में अपनाई गई नीति को ही आरक्षण व्यवस्था कहा जाता है. हाल ही में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बात करें तो इसके प्रभाव को लेकर मन में विचार आना स्वाभाविक हो जाता है. मुख्य बात यह निकलकर आती है कि यदि एससी/एसटी के लिए आरक्षण का रास्ता साफ हो जाता है तो क्या यह सुनिश्चित है कि अब तक जिस प्रकार पात्रों के बजाय अपात्रों को इसका फायदा मिलता आया है या कहें कि आरक्षण व्यवस्था का दुरुपयोग होता आया है तो क्या इस फैसले को लागू होने के बाद उद्देश्य की प्राप्ति हो पाएगी. इस सिस्टम के बारे में सोचकर उत्तर न ही आता है. ऐसे में यह भी बात बिल्कुल साफ ह...